नावा बाजार । पलामू । झारखण्ड क्रांति मंच के केन्द्रीय सचिव सह पूर्व प्रमुख नावाबाजार व रबदा पंचायत के भावी मुखिया प्रत्याशी रेणु देवी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है, कि अगर रबदा पंचायत की महान जनता ने मुखिया के रूप में कार्य करने का मौका दिया तो पंचायत के छोटे -मोटे मामलों का निपटारा पंचायत के माध्यम से किया जाएगा। हर मामले में थाने जाने की प्रवृति पर रोक लगाई जाएगी। उन्होंने कहा, कि ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से स्थापित भाईचारे, प्रेम व सौहार्द की संस्कृति को पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से मजबूत करने को प्राथमिकता देने की जरूरत है। यह चिंता की बात है कि पंचायती राज संस्थाओं पर रोटी, बोटी व घोटी के जरीए कब्जा करनेवाले विकास विरोधी तत्वों ने पंचायती राज के मुल भावना का गला घोंटते हुए इसे लूट का जरीया बना दिया है। रेणु देवी ने कहा है कि आज भी रबदा पंचायत समेत सम्पूर्ण नावाबाजार प्रखण्ड का इलाका पलायन जोन के रुप में जाना जाता है। हमारे इलाके के सभी जाति,धर्म व सम्प्रदाय के बेरोजगार नौजवान बाहर जाकर पेट पालने को मजबूर हैं।अगर कुटीर व लघु उद्योगों को ग्रामीण स्तर पर इमानदारी से बढ़ावा दिया जाए तो कभी-कभी बाहर में दूर्घटनाओं का शिकार हो कर काल कवलित होते नौजवानों के आश्रितों के हृरदयविदारक चित्कारों पर विराम लगाया जा सकता है।
नावा बाजार । पलामू । झारखण्ड क्रांति मंच के केन्द्रीय सचिव सह पूर्व प्रमुख नावाबाजार व रबदा पंचायत के भावी मुखिया प्रत्याशी रेणु देवी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है, कि अगर रबदा पंचायत की महान जनता ने मुखिया के रूप में कार्य करने का मौका दिया तो पंचायत के छोटे -मोटे मामलों का निपटारा पंचायत के माध्यम से किया जाएगा। हर मामले में थाने जाने की प्रवृति पर रोक लगाई जाएगी। उन्होंने कहा, कि ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से स्थापित भाईचारे, प्रेम व सौहार्द की संस्कृति को पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से मजबूत करने को प्राथमिकता देने की जरूरत है। यह चिंता की बात है कि पंचायती राज संस्थाओं पर रोटी, बोटी व घोटी के जरीए कब्जा करनेवाले विकास विरोधी तत्वों ने पंचायती राज के मुल भावना का गला घोंटते हुए इसे लूट का जरीया बना दिया है। रेणु देवी ने कहा है कि आज भी रबदा पंचायत समेत सम्पूर्ण नावाबाजार प्रखण्ड का इलाका पलायन जोन के रुप में जाना जाता है। हमारे इलाके के सभी जाति,धर्म व सम्प्रदाय के बेरोजगार नौजवान बाहर जाकर पेट पालने को मजबूर हैं।अगर कुटीर व लघु उद्योगों को ग्रामीण स्तर पर इमानदारी से बढ़ावा दिया जाए तो कभी-कभी बाहर में दूर्घटनाओं का शिकार हो कर काल कवलित होते नौजवानों के आश्रितों के हृरदयविदारक चित्कारों पर विराम लगाया जा सकता है।